श्री डूंगरगढ़ (बीकानेर)। चैत्र शुक्ल द्वितीया, विक्रम संवत 2083 के शुभ अवसर पर पुनरासर स्थित हनुमान मंदिर में जीर्णोद्धार कार्य को लेकर एक भव्य कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन पुनरासर हनुमान ट्रस्ट बीकानेर (कोलकाता) के तत्वावधान में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण एवं युवा शामिल हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ डूंगरगढ़ के विधायक ताराचंद सारस्वत द्वारा विधिवत शिला पूजन कर किया गया। इस अवसर पर सारस्वत ने अपने संबोधन में कहा कि पुनरासर का भव्य मंदिर ट्रस्ट, ग्रामवासियों एवं श्रद्धालुओं के सामूहिक सहयोग से निर्मित होगा। उन्होंने कहा कि “मंदिर निर्माण स्वयं बालाजी की प्रेरणा से होता है, हम सभी तो केवल निमित्त मात्र हैं।” उन्होंने पुनरासर को समृद्ध गांव बताते हुए कहा कि मंदिर के जीर्णोद्धार से क्षेत्र की आस्था और विकास दोनों को मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान ट्रस्ट के ट्रस्टीगण—मोटू हर्ष, बजरंग लाल पारीक, सम्पत पारीक, तुलसीदास पुरोहित, राजेश लदरेचा, डॉ. गिरिराज हर्ष, सुभाष आचार्य एवं जगदीश पारीक—द्वारा मुख्य अतिथि सहित अन्य अतिथियों का शॉल, साफा एवं दुपट्टा पहनाकर सम्मान किया गया। सम्मानित अतिथियों में सरपंच माननाथ सिद्ध, मंदिर पुजारी डालचंद, शिल्पकार नरेंद्र सोनगरा, भाजपा देहात जिला उपाध्यक्ष हेमनाथ जाखड़, महंत प्रेमनाथ तथा सेरूणा थाना प्रभारी संध्या विश्नोई शामिल रहे।
मुख्य वक्ता के रूप में सरपंच माननाथ सिद्ध एवं जगदीश पारीक ने कहा कि पुनरासर ग्राम मंदिर निर्माण कार्य में हर संभव सहयोग करेगा। ट्रस्ट की ओर से डॉ. गिरिराज हर्ष ने ग्रामीणों से आह्वान किया कि जैसे भगवान हनुमान ने संकल्प से समुद्र पार किया, उसी प्रकार यह निर्माण कार्य भी निरंतर और बिना बाधा के पूर्ण किया जाए। उन्होंने लक्ष्य रखा कि आगामी विक्रम संवत 2084 की प्रतिपदा पर नव-निर्मित मंदिर का भव्य उद्घाटन किया जाएगा।
इस अवसर पर तुलसीदास पुरोहित, सम्पत पारीक एवं सुभाष आचार्य ने भी श्रद्धालुओं से मंदिर जीर्णोद्धार में सहयोग की अपील की।
कार्यशाला में पुनरासर गांव के सैकड़ों गणमान्य नागरिकों एवं युवाओं ने भाग लिया। प्रमुख रूप से डिलूराम सिंवर, रूपनाथ, मुन्नीनाथ, आशाराम पारीक, हरिदास स्वामी, रामप्रताप गोदारा, चेतनराम मेघवाल एवं पूनमचंद स्वामी उपस्थित रहे। सभी ने मंदिर निर्माण कार्य में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन मोटू हर्ष द्वारा किया गया, जबकि मंच संचालन डॉ. श्रीकांत व्यास ने सुंदरकांड के दोहों के साथ प्रभावी ढंग से किया।



























