बीकानेर। बीकानेर के कोडमदेसर भैरुनाथ बाबा मंदिर के पीछे स्थित तालाब के हालात जीर्ण-शीर्ण हो चुके हैं। तालाब की स्थिति से अवगत कराते हुए कम्यूनिटी वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष कन्हैयालाल भाटी ने बताया कि पहली बार ऐसा हुआ है कि तालाब पूर्णत: सूख गया है, इतना ही नहीं सैकड़ों वर्ष पुराने इस तालाब की दीवारें भी जर्जर हो गई है। भाटी का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या जर्जर हो चुकी दीवारें हैं जिनकी समय रहते यदि मरम्मत अथवा पुनर्निमित नहीं की गई तो बड़ा हादसा हो सकता है। इन दीवारों के गिरने से सीधा असर मंदिर पर भी पडऩे की संभावना है। आस्था का केन्द्र बने इस मंदिर में रविवार सहित अनेक विशेष अवसरों व तिथियों पर हजारों श्रद्धालुओं का आगमन रहता है। भाटी ने बताया कि कुछ समय पहले प्रशासन द्वारा तालाब की सुध लेने की खबरें सामने आई थी लेकिन धरातल पर फिलहाल कुछ नजर नहीं आ रहा है। मानसून से पहले यदि तालाब की सफाई, दीवारों का निर्माण एवं अन्य जीर्णोद्वार संबंधी कार्य हो जाते हैं तो आस्था के साथ-साथ हजारों पशु-पक्षियों, जीवों के लिए वरदान साबित होगा। भाटी ने प्रशासन से आग्रह किया है कि शीघ्र यह कार्य करवाया जाए अन्यथा जनसहयोग द्वारा इसे शुरू किया जाएगा।
अतिक्रमण भी बड़ा कारण
सैकड़ों वर्ष पुराने इस तालाब में सदैव पर्याप्त जल रहता था, न केवल पशु-पक्षियों बल्कि ग्रामीणों के लिए भी जरुरत के समय यह तालाब उपयोगी रहा है। तालाब के खाली होने का एक बड़ा कारण तालाब के मार्ग में अतिक्रमण होना भी है। यदि अतिक्रमण हटाए नहीं गए तो तालाब का अस्तित्व ही बचना मुश्किल है।
फिलहाल टैंकर सप्लाई से बुझ रही प्यास
कन्हैयालाल भाटी ने बताया कि तालाब सूख जाने से पशु-पक्षियों व असंख्य जीवों की प्यास नहीं बुझ पा रही थी, इसी दुखद स्थिति को देखते हुए कम्यूनिटी वेलफेयर सोसायटी के माध्यम से जनसहयोग द्वारा तालाब में एक छोटी पाळ बनवा कर उसमें पानी की सप्लाई टैंकरों के माध्यम से करवाई जा रही है। टैंकरों की सप्लाई का उद्देश्य यही है कि जब तक बारिश नहीं आती तब तक कुछ पानी वहां एकत्र रहे ताकि जीवों की प्यास बुझ सके।



























