बीकानेर। दीपोत्सव पर लक्ष्मी पूजन का विधान सदियों से है। इस बीच कई परंपराएं हर शहर में वहां की संस्कृति और समाज के हिसाब से विकसित हो जाती हैं। होली पर रम्मतों के लिए प्रसिद्ध बारह गुवाड़ चौक भी अपने आप में एक ऐसा स्थान है जो हर पर्व पर संस्कृति को बचाने के लिए वर्षों से आयोजन करता रहा है। आगामी 7 नवंबर 2026 को दीपावली की एक रात पहले (रूप चतुर्दशी) यहां पर पिछले 203 साल से शारीरिक दक्षता दिखाने के लिए बनाटी घुमाने का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
जलती मशाल से कड़े अभ्यास के साथ करतब
सिर के ऊपर और पैरों के नीचे से आठ से 12 किलो वजनी दोनों तरफ जलती मशाल के साथ बंधी लकड़ी को घुमाना आम आदमी के बस की बात नहीं है। इसके लिए प्रशिक्षित उस्ताद के नेतृत्व में कड़ा अभ्यास करवाया जाता है। इस बार भी बारह गुवाड़ चौक में रात नौ बजे बनाटी घुमाने का कार्यक्रम होगा, जिसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
तेल में भिगोकर तैयार होती है बनाटी
ईश्वर महाराज और शेर महाराज बताते हैं कि बनाटी बनाना भी अपने आप में एक कला है। लकड़ी के दोनों तरफ सूत के कोड़े बनाकर उसे तेल में दो दिन तक भिगोते हैं। दोनों तरफ संतुलन बना रहे, इसके लिए हर कोड़े का वजन और आकार एक जैसा रखते हैं। पहले यह काम जूट से होता था, अब तेल इसलिए लेते हैं क्योंकि वह गाढ़ा होता है और लंबे समय तक मशाल जलती रहती है।
सभी वर्गों की सहभागिता व सुरक्षा
यह शारीरिक दक्षता दिखाने का पारंपरिक खेल है। तेज अग्नि और वजन के साथ इसमें गति को शामिल करते हुए करतब दिखाना शहर की अनूठी परंपरा है। एक चूक से बड़ा नुकसान हो सकता है, मगर मां लक्ष्मी और भैरूनाथ की कृपा से आज तक ऐसा नहीं हुआ। इसमें बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी भाग लेते हैं तथा आसपास के मोहल्ले के लोग तेज आवाज में नारे लगाकर उनमें जोश भर देते हैं।
पावन स्मृति एवं कुशल सानिध्य
यह पूरा भव्य एवं साहसिक आयोजन सनाथा महाराज, फागणिया मारजा एवं पागा मारजा की पावन स्मृति में आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन वर्तमान में ईश्वर महाराज एवं समस्त बारहगुवाड़ के महानुभाव के सानिध्य में संपन्न हो रहा है। पिछले एक महीने से कड़े अभ्यास में जुटे युवा और अनुभवी बुजुर्ग इस रात अपना अद्भुत प्रदर्शन दिखाएंगे।




























