बीकानेर। दीपावली का पर्व खुशियां बांटने, आपसी प्रेम और सौहार्द को मजबूत करने का अवसर होता है। इस अवसर पर भाजपा से महापौर प्रत्याशी रहे पार्षद डॉ. सुरेन्द्र सिंह ने सामाजिक सरोकारों से जुड़ी एक अनुकरणीय पहल करते हुए वार्ड संख्या 13 के स्वच्छता सेनानियों और जमादारों के साथ दीपावली भोज का आयोजन किया। उनके इस आयोजन का उद्देश्य शहर को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सफाई कर्मचारियों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करना रहा। इस अवसर पर डॉ. सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि स्वच्छता सेनानी हमारे शहर के असली हीरो हैं। जब पूरा शहर त्योहार की खुशियां मनाने में व्यस्त रहता है, तब ये कर्मचारी सुबह पांच बजे से ही शहर की सफाई व्यवस्था को सुचारू रखने में जुट जाते हैं। इनके परिश्रम और समर्पण के कारण ही शहर स्वच्छ और व्यवस्थित बना रहता है। ऐसे में इनका सम्मान करना हम सभी का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता सेनानी उनके लिए केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य हैं। दीपावली जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर परिवार के सदस्यों के साथ खुशियां बांटना जरूरी है। इसी भावना के साथ उन्होंने निर्णय लिया कि दीपावली का पहला भोज अपने इन अपनों के साथ किया जाए।
सफाई कर्मचारियों ने उठाईं अपनी समस्याएं और मांगें
कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता सेनानियों ने वार्ड की सफाई व्यवस्था और अपनी कार्य परिस्थितियों से जुड़ी समस्याएं भी डॉ. सुरेन्द्र सिंह के समक्ष रखीं। कर्मचारियों ने बताया कि लगातार बढ़ती जनसंख्या और परिवारों की संख्या के अनुपात में वार्ड में सफाई कर्मचारियों की संख्या पर्याप्त नहीं है। ऐसे में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नई भर्ती किए जाने की आवश्यकता है।
इसके साथ ही कर्मचारियों ने कार्य के दौरान सुरक्षा के लिए आवश्यक संसाधन नियमित रूप से उपलब्ध कराने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि सफाई कार्य के दौरान दस्ताने, सुरक्षा जूते, मास्क और निर्धारित वर्दी मिलना बेहद जरूरी है, ताकि कर्मचारियों को संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से बचाया जा सके।
सामाजिक सरोकारों की पहल बनी चर्चा का विषय
दीपावली के अवसर पर आयोजित इस सहभोज में पार्षद द्वारा सफाई कर्मचारियों के साथ समान रूप से बैठकर भोजन करना और उनके परिवार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर चर्चा करना उपस्थित लोगों के लिए विशेष अनुभव रहा। इस आयोजन को राजनीति से परे मानवीय संवेदनाओं, श्रम के सम्मान और सामाजिक समरसता की मिसाल के रूप में देखा गया।
डॉ. सुरेन्द्र सिंह की इस पहल ने यह संदेश दिया कि शहर की स्वच्छता में योगदान देने वाले कर्मचारियों का सम्मान केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें समाज और परिवार का अभिन्न हिस्सा मानते हुए उनके सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य के लिए भी प्रयास किए जाने चाहिए।



























