बीकानेर। बेसिक पी.जी. महाविद्यालय, बीकानेर के तत्वावधान में दो दिवसीय ‘इनोवेटिव साइंस एक्सपो-2026’ का आज महाविद्यालय परिसर में शुभारम्भ हुआ। विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार, रचनात्मक चिंतन एवं अनुसंधान की प्रवृत्ति विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित इस विज्ञान प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने अपनी वैज्ञानिक कल्पनाशीलता, मौलिक सोच एवं तकनीकी दक्षता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
‘इनोवेटिव साइंस एक्सपो-2026’ का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उन्हें प्रयोग, अनुसंधान, नवाचार एवं व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से विज्ञान की संभावनाओं से परिचित करवाना है। यह आयोजन युवा प्रतिभाओं को अपनी वैज्ञानिक सोच को साकार रूप देने तथा अपनी रचनात्मक क्षमताओं को सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रहा है।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित शैक्षणिक, साहित्यिक एवं प्रशासनिक हस्तियों ने विज्ञान प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस अवसर पर प्रोफेसर (डॉ.) आर. के. पुरोहित, प्राचार्य, राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर; प्रोफेसर (डॉ.) अभिलाषा आल्हा, विभागाध्यक्ष, गृहविज्ञान, राजकीय महारानी सुदर्शना महाविद्यालय, बीकानेर; डॉ. हरिशंकर आचार्य, उपनिदेशक, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, बीकानेर; प्रख्यात साहित्यकार श्रीमान् राजेन्द्र कुमार जोशी; महाविद्यालय प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष श्री रामजी व्यास तथा बेसिक पी.जी. महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुरेश पुरोहित ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
अतिथियों ने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत वैज्ञानिक मॉडलों, नवाचारी विचारों एवं रचनात्मक प्रस्तुतियों में विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने विद्यार्थियों से उनके प्रोजेक्ट्स की कार्यप्रणाली, वैज्ञानिक अवधारणाओं एवं उनकी उपयोगिता के सम्बन्ध में संवाद भी किया। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह एवं आत्मविश्वास के साथ अपने विचारों और परियोजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की। अतिथियों ने विद्यार्थियों की जिज्ञासु प्रवृत्ति, वैज्ञानिक अभिरुचि एवं नवाचार की भावना की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, समस्या समाधान की क्षमता तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस विज्ञान एक्सपो का आकर्षण केवल महाविद्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बीकानेर के विभिन्न राजकीय एवं निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी प्रदर्शनी का भ्रमण किया। विद्यालयी विद्यार्थियों ने विज्ञान के विविध आयामों, नवाचारों एवं रचनात्मक प्रस्तुतियों को उत्सुकता के साथ देखा। प्रदर्शनी उनके लिए विज्ञान को नजदीक से समझने, नए विचारों से परिचित होने तथा भविष्य में वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षेत्रों में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त करने का माध्यम बनी।
विद्यालयों से आए विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता ने आयोजन को शैक्षणिक संवाद एवं ज्ञान-विनिमय का व्यापक मंच प्रदान किया। इससे विद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर के विद्यार्थियों के मध्य वैज्ञानिक अभिरुचि और नवाचार की संस्कृति को प्रोत्साहन मिला।
आज के प्रतिस्पर्धात्मक एवं तकनीकी युग में विज्ञान और नवाचार की भूमिका निरन्तर महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे समय में विद्यार्थियों को अपनी कल्पनाशीलता को प्रयोगों एवं व्यावहारिक परियोजनाओं के माध्यम से अभिव्यक्त करने का अवसर देना अत्यंत आवश्यक है। ‘इनोवेटिव साइंस एक्सपो-2026’ इसी सोच का परिणाम है। यह आयोजन विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने, नई संभावनाएं तलाशने, मौलिक समाधान विकसित करने और अपनी प्रतिभा पर विश्वास करने के लिए प्रेरित कर रहा है।
महाविद्यालय का यह प्रयास शिक्षा को कक्षा-कक्ष की सीमाओं से आगे ले जाकर उसे प्रयोगात्मक, रचनात्मक एवं जीवनोपयोगी बनाने की दिशा में एक सार्थक पहल है। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में न केवल वैज्ञानिक चेतना का विकास करते हैं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, सहयोग, नेतृत्व एवं टीम भावना जैसे महत्वपूर्ण जीवन कौशलों को भी प्रोत्साहित करते हैं।
उल्लेखनीय है कि ‘इनोवेटिव साइंस एक्सपो-2026’ का आयोजन 2 एवं 3 नवम्बर, 2026 को बेसिक पी.जी. महाविद्यालय, बीकानेर में किया जा रहा है। इस आयोजन के माध्यम से युवा विद्यार्थियों को अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा, नवाचारी विचारों एवं रचनात्मक क्षमताओं को प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।
महाविद्यालय का यह आयोजन इस संदेश को सार्थक रूप प्रदान करता है कि आज के विद्यार्थी ही कल के वैज्ञानिक, शोधकर्ता, तकनीकी विशेषज्ञ एवं नवाचार के अग्रदूत हैं। उनकी जिज्ञासा को प्रोत्साहित करना और उनकी प्रतिभा को उचित मंच प्रदान करना ही उज्ज्वल एवं आत्मनिर्भर भविष्य की आधारशिला है।
‘इनोवेटिव साइंस एक्सपो-2026’ ने अपने प्रथम दिवस पर ही विज्ञान, शिक्षा एवं नवाचार के प्रति सकारात्मक वातावरण निर्मित करते हुए यह सिद्ध किया कि यदि युवा मस्तिष्कों को उचित अवसर एवं प्रोत्साहन मिले, तो वे अपनी कल्पनाशीलता और वैज्ञानिक सोच से भविष्य की नई संभावनाओं के द्वार खोल सकते हैं।




























