बीकानेर | बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल ने राजस्थान सरकार द्वारा गठित समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) समिति को एक विस्तृत सुझाव-पत्र प्रेषित कर समान नागरिक संहिता का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक समरसता, न्याय, महिला सशक्तिकरण, पारिवारिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकता तथा आर्थिक स्थिरता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया है।
व्यापार मंडल के अध्यक्ष जुगल राठी ने अपने सुझावों में कहा कि समान नागरिक संहिता केवल विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों का एकीकरण नहीं है, बल्कि यह संविधान में निहित समानता एवं न्याय के सिद्धांतों को व्यवहारिक रूप से लागू करने का सशक्त माध्यम बन सकती है। स्पष्ट एवं एकरूप नागरिक कानूनों से समाज के साथ-साथ व्यापार एवं उद्योग जगत को भी स्थिरता एवं पारदर्शिता प्राप्त होगी।
व्यापार मंडल के सचिव संजय जैन सांड द्वारा समिति को दिए गए अपने सुझावों में सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं दत्तक ग्रहण संबंधी समान एवं सरल कानून लागू करने, विवाह एवं तलाक का अनिवार्य पंजीकरण, सभी नागरिकों के लिए एक पति–एक पत्नी की व्यवस्था तथा वृद्ध माता-पिता के भरण-पोषण को लागू करने के लिये 2007 के कानून को कठोर एवं प्रभावी बनाए जाने की अनुशंसा की ।
व्यापार मंडल के प्रतिनिधि साजिद सुलेमानी ने कहा कि उत्तराधिकार संबंधी नए प्रावधान इतने स्पष्ट एवं व्यवहारिक हों कि किसी पारिवारिक विवाद के कारण चल रहे व्यापार या उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े तथा **”बिज़नेस कंटिन्यूटी (Business Continuity)” सुनिश्चित हो सके। इसके लिए सिंगल विंडो डिजिटल सिस्टम विकसित करने का भी सुझाव दिया गया है। पार्टनरशिप फर्म, एलएलपी (LLP), कंपनियों की शेयरहोल्डिंग एवं स्वामित्व संबंधी अभिलेखों में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया पूर्णतः डिजिटल, पेपरलेस, सरल एवं समयबद्ध** बनाई जाए।
ज्ञापन में वैवाहिक एवं पारिवारिक कानूनों के दुरुपयोग को रोकने हेतु झूठे मामलों में दंडात्मक प्रावधान, पारिवारिक विवादों में अनिवार्य मध्यस्थता (Family Mediation), तथा उद्योग एवं व्यापार से जुड़े उत्तराधिकार एवं स्वामित्व परिवर्तन की प्रक्रियाओं को **Ease of Doing Business** के अनुरूप सरल बनाने की भी अनुशंसा की गई है।
मंडल ने यह भी सुझाव दिया कि समान नागरिक संहिता में नागरिकों के अधिकारों के साथ-साथ उनके कर्तव्यों का भी स्पष्ट उल्लेख किया जाए तथा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान एवं समयबद्ध न्यायिक व्यवस्था विकसित की जाए।
बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल ने अपने ज्ञापन में विश्वास व्यक्त किया कि जैसे “एक राष्ट्र–एक कर (GST)” ने देश की कर व्यवस्था को सरल एवं एकीकृत बनाया है, उसी प्रकार “एक राष्ट्र–एक नागरिक कानून” न्यायिक व्यवस्था में समानता, पारदर्शिता एवं राष्ट्रीय एकीकरण को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
मंडल द्वारा प्रस्तुत यह ज्ञापन समान नागरिक संहिता समिति के साथ-साथ माननीय मुख्यमंत्री, विधि एवं विधिक कार्य मंत्री, मुख्य सचिव, जिला कलक्टर, संभागीय आयुक्त, स्थानीय सांसद, विधायकों तथा संबंधित विभागों को भी प्रेषित किया गया है।



























