बीकानेर। देश में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल के रूप में भारतीय शिक्षा बोर्ड (BSB) तेजी से विस्तार कर रहा है। फरवरी 2023 में शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार से मान्यता प्राप्त यह बोर्ड अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) से भी इसे मान्यता मिल चुकी है, जिससे इसकी विश्वसनीयता और बढ़ी है।
स्थानीय स्तर पर भी रुचि
बीकानेर में भी BSB के प्रति रुचि बढ़ रही है। नोखा रोड स्थित भीनासर में अर्हम इंग्लिश एकेडमी को जिले में पहली संबद्धता प्राप्त होने का दावा किया जा रहा है। BSB प्रबंधन का कहना है कि यह बोर्ड पारंपरिक शिक्षा पद्धति के साथ-साथ आधुनिक तकनीक को अपनाकर भारत को शिक्षा, चिकित्सा और आर्थिक क्षेत्रों में मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
BSB को योग गुरु बाबा रामदेव के शिक्षा विजन से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि मुरारी बापू इसके संरक्षक हैं। बताया जाता है कि इस बोर्ड का विचार वर्ष 2012 में सामने आया था, जिसे 2019 में केंद्र सरकार की मंजूरी मिली।
भारतीय ज्ञान और आधुनिक शिक्षा का संगम
BSB का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ना है। इसके अंतर्गत योग, वैदिक गणित, वेद-उपनिषद, संस्कृत जैसे विषयों के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा साइंस को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। 6वीं कक्षा से AI और 9वीं से डेटा साइंस पढ़ाने की योजना इसकी विशेषता मानी जा रही है।
संस्कारयुक्त और तकनीकी शिक्षा पर जोर
बोर्ड का फोकस केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि नैतिक, सामाजिक और वैचारिक मूल्यों के विकास पर भी है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को संस्कारयुक्त और समग्र शिक्षा प्रदान करना है।
तेजी से बढ़ रहा दायरा
देशभर में 1000 से अधिक विद्यालयों में BSB का पाठ्यक्रम लागू हो चुका है। राजस्थान में भी इसकी पकड़ मजबूत होती नजर आ रही है, जहां कुछ ही महीनों में लगभग 500 विद्यालयों ने संबद्धता ले ली है। आगामी पांच वर्षों में 5 लाख विद्यालयों को जोड़ने और 10 हजार विद्यालय संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है।
पाठ्यक्रम और गतिविधियां
करीब 2000 प्रोफेसरों और 5000 शिक्षकों के सहयोग से तैयार पाठ्यक्रम में भारतीय परंपरा और आधुनिक शिक्षा का संतुलन रखा गया है। इसके अलावा नवंबर 2025 में हरिद्वार, आगरा, लखनऊ और जयपुर में BSB की पहली राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया।




























